Biography Syed Waseem Rizvi : जानिये वसीम रिजवी के बारे में हर बात

अगर आप सोशल मीडिया पर समय गुजारते हैं तो आपने ‘वसीम रिजवी’ का नाम जरूर सुना होगा। हाल ही में इन्होंने इस्लाम छोड़ सनातन धर्म अपनाया है। धर्म बदलने के बाद उनका नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी हो गया है। वसीम ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में यति नरसिंहानंद गिरी की मौजूदगी में सनातन धर्म ग्रहण किया। मगर आखिर ऐसी नौबत क्यों आई? उन्हें ऐसा क्यों करना पड़ा? जानिए!

कौन हैं वसीम रिजवी?

वसीम रिजवी उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक आम परिवार में हुआ। बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। वो परिवार में सब भाई बहनों से बड़े थे इसलिए कम उम्र में ही परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी। वसीम नैनीताल से पढ़ाई की और फिर नौकरी करने विदेश चले गये। सऊदी अरब, जापान और अमेरिका में उन्होंने काफी समय गुज़ारा। वसीम फिल्म निर्माता और लेखक भी हैं।

10 साल तक शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड में रहे

विदेश से लौटने के बाद वसीम रिजवी ने साल 2000 में कश्मीरी मौहल्ले से नगर निगम का चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा। सन 2008 में वे शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मेंबर बन गए और दस साल तक वक्फ बोर्ड में रहे। इस बीच वो कई विवादों में रहे। विवादों में घिरने के बाद समाजवादी पार्टी ने भी उनसे किनारा कर लिया।

विवादों से रहा है पुराना ताल्लुक

नारायण सिंह त्यागा बने वसीम रिजवी कई बार विवादों में रहे हैं। कभी उनकी बेबाकी किसी को चुभी है तो कभी उनके तेवर ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है। वो इस्लाम के कट्टर विरोधी रहे हैं। वसीम ने एक किताब लिखी थी जिसमें उन्होंने इस्लाम और पैगंबर मौहम्मद की तल्ख आलोचना की थी।

यही नहीं उन्होंने कुरान की 26 आयतें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक दायर कर दी थी। वो इस्लाम में सकारात्मक बदलाव चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जमीन आसमान एक भी कर दिया था। उनके इस रवैये से मुस्लिम समाज हरदम खफ़ा रहता था। कई मौलानाओं ने उनके खिलाफ फतवे जारी किये और उनके सिर कलम करने तक की बात कही।

आखिर क्यों छोड़ा इस्लाम?

धर्म परिवर्तन करने के बाद नारायण सिंह बने वसीम रिजवी ने कहा कि उन्होंने इस्लाम से निकाल दिया गया है और अब यह उनपर निर्भर करता है कि वो किस धर्म में दाखिल होगें। और अंततः उन्होंने सनातन धर्म को चुना।

धर्म परिवर्तन पर राजनीति गरमाई

वसीम रिजवी के धर्म बदलने पर राजनीति शुरू हो चुकी है। जो वसीम का पक्ष ले रहे हैं उनका कहना है कि उन्होंने घरवापसी कर जीवन का सबसे उत्तम निर्णय लिया है। वहीं दूसरी ओर वसीम रिजवी के विरोधियों को कहना है कि वो आये थे कुरान बदलने लेकिन खुद ही बदल गये।

किसी भी नागरिक के धर्म बदलने की कानूनी प्रक्रिया क्या है?

अगर कोई अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे कुछ कानून प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। सबसे पहले उसे कोर्ट में एफिडेटिव बनवाना होगा, ये नाम था, अब मुस्लिम से हिंदू धर्म बदल रहा हूं, नाम पिता का नाम देकर एफिडेविट देना होता है। उस हलफनामे के आधार पर अखबार में विज्ञापन देना होगा कि मैंने अपना धर्म बदल दिया है। सरकार मान्यता दे इसलिए गजट के माध्यम से नोटिफाई करना होगा। मान्यता लेने के बाद डीएम नोटिफाई करते हैं और उस डॉक्यूमेंट के आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है।

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