How To Start a Company : खुद की कम्पनी कैसे स्टार्ट करें , सम्पूर्ण जानकारी

 

हाऊ टू स्टार्ट कम्पनी : कम्पनी खोलना सबकी बात नहीं होती है अगर आप खुद की नई कम्पनी खोलना चाहते है तो आपको पैसे के साथ साथ कानूनी कार्रवाई से भी महीनों गुरजना पड़ेगा। कम्पनी वह होती है जिसे कुछ प्रशिक्षित लोग मिलकर बनाते है जिसका उपयोग विभिन्न तरीकों के समान खरीदने से लेकर बेचने तक का काम कम्पनी में होता है देश में बहुत सारी कम्पनियां है जो कम समय में बुलंदियों को छू रही है तो कई ऐसी कम्पनी है जिन्हे वर्षो बीत जाने के बाद आज भी संघर्ष कर रही है बाजार में कंपटीशन का दौर है और हर बिजनेसमैन दूसरे की कम्पनी को गिराने के लिए किसी भी हद तक चली जाती है चाहे उसके लिए पानी की तरह पैसा क्यों न बहाया जाए। आपको हम इस आर्टिकल के माध्यम से यह बताने का प्रयास करेंगे की कम्पनी क्या होती है इसे कैसे शुरू करें  साथ ही कागजी कार्रवाई के लिए सरकारी दफ्तरों के कितने महीने चक्कर लगाने पड़ते है इसकी पूरी जानकारी आपको बताएंगे।

कम्पनी क्या है

सवाल जितना सरल दिख रहा है उत्तर उससे भी आसान है लेकिन एक कम्पनी को  खड़ी करना आसान नहीं होता । कम्पनी को खड़ा करना और बुलंदियों तक ले जाना । मार्केट में सबसे सफल कम्पनी बनकर दिखाना आसान नहीं होता है इसके लिए दिन रात पूरे स्टाफ की कड़ी मेहनत वर्षो तक लगती है और समय समय पर मार्केट की मांग के अनुसार अपनी कम्पनी मे बदलाव करना ग्राहक के भरोसे पर खरा उतरना नफा नुकसान ऐसी तमाम चुनौतियों से कम्पनी को गुजरना पड़ता है अब समझ लेते है आखिर कम्पनी है क्या । इसे आसान भाषा में समझिए कुछ चुने हुए प्रशिक्षित अधिकारी जब एक संगठन को मिलाकर चलाते है तब वह एक कम्पनी बन जाती है इसके बाद कम्पनी में शेयारधारको द्वारा सामान को बेचने और खरीदने के लिए सेवाओं का आदान प्रदान करने के लिए कम्पनी का निर्माण किया जाता है यहां एक बात समझते योग्य है कि कुछ कंपनियां लाभकारी संगठन से जुड़ी होती है तो कुछ कम्पनी गैर लाभकारी संगठन से जुड़ी होती है कोई भी इंसान अकेले किसी कम्पनी को नहीं चला सकता इसके लिए उसे श्रमिको और मैनेजर साथ ही साजो समान की जरूरत होती है । कम्पनी को अपने श्रमिको को मेडिकल इंश्योरेंस , त्योहार पर भत्ता और समय समय पर वेतन मे बढ़ोत्तरी करनी होती है ।

कम्पनी कितने प्रकार की होती है

आपको बता दें कि कम्पनी एक तरह की नहीं होती यह कई प्रकार की होती है

निजी कम्पनी – निजी कम्पनी उसे कहते है जिसने दो या दो से अधिक लोग कम्पनी अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड होते है और अलग से एक कम्पनी बनाते है फिर धीरे से व्यापार शुरू कर देते है

सार्वजनिक कम्पनी – इसमें न्यूनतम 7 सदस्य हो सकते है इसमें कानूनी वस्तुओं को भी रखा जाता है आगे चलकर इस कम्पनी में और अधिक लोग जुड़ सकते है क्योंकि यह एक पंजीकृत कम्पनी होती है

साझेदार कम्पनी –  यह एक ऐसी कम्पनी है जिसमे दी या दो से अधिक लोग मिलकर कम्पनी चलाते है और सभी साझेदार लोग इस कम्पनी के अपने अपने हिस्से के मालिकाना हक के दावेदार होते है ।

कम्पनी को रजिस्टर्ड कराना क्यों जरूरी है

जब आप कम्पनी शुरू करने के बारे में सोचते है तो उसमें पैसे लगाकर ऐसे ही नहीं शुरू कर सकते । उसके लिए आपको अपनी कम्पनी को रजिस्टर्ड कराना होगा । क्योंकि किसी कम्पनी को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम्पनी का रजिस्टर्ड होना बहुत जरूरी है  इसके कई लाभ होते है कम्पनी को रजिस्टर्ड कराने से आप कानूनी तौर पर भविष्य में उसके हकदार होंगे । कोई भी आपकी कम्पनी में अवैध कब्जा नहीं कर सकता । किसी कारण वश अगर कम्पनी को कोई नुकसान पहुंचता है तो आपको सरकारी मुवावजा मिलने मे कठिनाई नहीं होगी । कम्पनी को पंजीकृत कराने से आप अपने सामान और उत्पाद के मालिक होंगे ।  कम्पनी नहीं रजिस्टर्ड कराने पर आपको कम्पनी को अवैध माना जाएगा । आपके साथ फिर अन्य कम्पनी वाले व्यापार नहीं करेंगे।  नुकसान होने पर अगर कम्पनी कानूनी तौर पर पंजीकृत नहीं है तो बैंक से आपको लोन नहीं मिलेगा।

कम्पनी को रजिस्टर कैसे करें

आप लोगों ने अभी तक यह समझ लिया कि आखिर कम्पनी क्या होती है अब आपको बताते है कि अपनी कम्पनी को कैसे रजिस्टर करें । भारतीय कम्पनी अधिनियम के तहत आपको कम्पनी के रजिस्ट्रेशन के समय आपको एक कोरिया नंबर दिया दिया जाता है जिसे DIN कहते है मतलब DIRECTOR IDENTIFICATION NUMBER होता है उस कोड को कम्पनी के प्रबन्धक यानी जो मालिक होता है उसकी पहचान होती है इसके लिए फीस भी ली जाती है इसके बाद आपको डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट लेना होता है रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी आदि जानकारी पूरी होती है कम्पनी किस चीज की है कितने लोग है कम्पनी कहां पर है लोन से खड़ी की है या खुद की पूंजी से इसकी पूरी जानकारी देनी होती है फिर आधिकारिक रूप  आपकी कम्पनी रजिस्टर मानी जाती है ।

 

 

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