WHAT IS LIABILITIES : क्या होती है लायबिलिटी, कितना महत्व है इसका , कितने प्रकार की होती है

 

क्या होती है लायबिलिटी 

 

यह शब्द तो आपने जरूर सुना होगा । हम बोलचाल की भाषा में इस शब्द का उपयोग खूब करते है। जो नहीं जानते वो सब जान लें । दरअसल लायबिलिटी का मतलब देयता होता है देयता किसी व्यक्ति और कम्पनी का बकाया होता है जो धन की एक राशि होती है धन वास्तु या सेवा सहित आर्थिक फायदे के ट्रांसफर के जरिए समय के साथ देयताओ का निपटना होता है बैलेंस शीट के दाएं ओर रिकॉर्ड देयताओ मे लोन , साथ एकाउंट पेयबल मर्गेज, डिफार्ट रेवेन्यू ,ब्रांड वारंटी और लिए गए व्यव शामिल होते है । मसलन देयता पक्ष और दूसरे पक्ष का दायित्व है । जिसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है एकाउंटिंग की दुनिया में वित्तीय बाध्यता एक दायित्व है लेकिन इसे पिछले बिजनेस ट्रांजकसन , इवेंट और विक्रय एसेट सेवाओं के एक्सचेंज या कोई भी चीज जो बाद में आर्थिक लाभ प्रदान करती है

क्या है मुख बातें

* देयता एक ऐसी चीज होती है जो किसी और पर देय होती है 
* देयता का अर्थ कानूनी और रेगुलेटरी जोखिम पर बाध्य नहीं हो सकती है 
* कारपोरेट  एकाउंटिंग मे कम्पनी एसेट के विपरीत देनदारियां बुक करती है ।
* आपको बता दें कि वर्तमान देयता कम्पनी की अल्पकालिक वित्तीय देनदारियां होती है 
* दीर्घ कालिक देनदारियां बैलेंस सीट पर सूची बद्ध दायित्व है जो एक साल से अधिक समय के लिए बकाया नहीं है । उदाहरण बॉन्ड ब्याज भुगतान

कितने प्रकार की होती है लायबिलिटी

लायबिलिटी दो प्रकार की होती है

करेंट लायबिलिटी – ये ऐसी लायबिलिटी होती है जिसे कम समय में चुकाना होता है इसे हम सीमित करेंट लायबिलिटी कहते है। ऐसे कर्ज जिन्हे हमें एक वर्ष के फाइनेंशियल समय में चुकाना होता है उदाहरण , स्कूल फीस, इलेक्ट्रिक बिल, कर्मचारियों का भुगतान ,टैक्स पेईंग, बैंक ओवर ड्राफ्ट , शॉर्ट लोन

नॉन करेंट लायबिलिटी – ये ऐसी लायबिलिटी है मतलब ये ऐसे कर्ज है जिन्हे चुकाने के लिए एक वर्ष से अधिक समय मिलता है अधिक समय मिलने की वजह से हम इसे लोंग टर्म लायबिलिटी कहते है। ज्यादातर लोग लोग टर्म के आधार पर पैसा लेते है जिससे अधिक समय मे चुकाया जा सके । 

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