UP Election 2022 : गोरखपुर से योगी ने कहा – मैं लोक कल्याण के लिए राजनीति में आया हूं

योगी आदित्यनाथ जब भी अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर आते हैं उनका तेवर देखने लायक होता है। हाल ही में उन्होंने गोरखपुर में बड़ी जनसभा को संबोधित किया। योगी ने कहा कि – जो लोग मेरे परिवार को लेकर सवाल उठाते हैं, उनको बताना चाहूंगा कि उनके लिए परिवार ही प्रदेश था। सारे संसाधनों व पदों की बंदरबांट परिवार तक ही सीमित थी। मेरे लिए प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही मेरा परिवार है। हम उसी के कल्याण के लिए बिना भेदभाव के पूरी पारदर्शिता से सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के नारे को साकार कर रहे हैं। यही संविधान की मूल भावना भी है।

आगे योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा कि – जिनका सोच सिर्फ अपने परिवार, जाति व मजहब तक सिमटी थी, वह सबके साथ-सबके विकास का मर्म नहीं जान सकते हैं। इन लोगों ने माफिया के संरक्षण, आतंकियों की रहनुमाई करके यूपी के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया था। उस यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ, जहां काशी, मथुरा, अयोध्या, गंगा, यमुना है। वह यूपी, जो भगवान राम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर की धरती रही है। पांच साल के दौरान यूपी की पहचान की पहचान बदली है। अब पहचान का संकट खत्म हो गया है। अब लोग गर्व से कहते हैं कि मैं, यूपी से हूं। इस पर जवाब मिलता है कि जहां अयोध्या है, काशी है, मथुरा है और अंत में यह भी बोल पड़ते हैं कि ओ हो योगी वाले यूपी से हो।

अपने शुरुआती दिनों का स्मरण करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि – शुरुआती दिनों में एक बार मेरा राजनीति से मोहभंग हुआ था। बात गुरुदेव तक पहुंची तो उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि अगर राजनीति का मकसद सत्ता, पद और प्रभुता है तो मैं, तुमसे सहमत हूं, लेकिन मेरी समझ से राजनीति का मतलब लोक कल्याण है। राजनीति की चुनौतियों में ही लोक कल्याण के लिए अवसर मिलता है। मेरी जिज्ञासा फिर भी शांत नहीं हुई। इसपर पूछा कि संन्यास का क्या मतलब है? तब उनका जवाब था सेवा। सेवा का उद्देश्य होता है अपने अहंकार की तिलांजलि। उनके इसी भाव को लेकर बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे, बिना झुके, मौसम से बेपरवाह सांसद के रूप में और मुख्यमंत्री के रूप में अपना जीवन लोक कल्याण के पथ को समर्पित कर दिया। इस समर्पण का बदलाव भी लोगों को दिख रहा होगा।

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