WHAT IS POSTPARTUM DEPRESSION : क्या होता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन , क्यों होता है , कैसे सम्भव का इसका इलाज पूरी जानकारी

 

पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होती है

इस शब्द से शायद ही कोई परिचित हो । लेकिन यह एक गम्भीर समस्या नहीं बीमारी है यह बीमारी गर्भवती महिलाएं में होती है जो बच्चे को जन्म देने का बाद इस स्थित में आ जाती है जैसे उन्हे आत्महत्या का ख्याल आता है । डिलवरी के बाद चार मे से एक महिला मे पोस्टपार्टम डिप्रेशन होता है । इसे पोस्ट डिलवरी स्ट्रेस भी कहते है। बच्चे के जन्म के बाद महिला के जीवन में आधारभूत परिवर्तन होता है इसमें महिलाओ के कई प्रकार के अनुभव होते है । इसलिए यह महिलाओ में चिंता और अवसाद का कारण बनती है । नई ज़िम्मेदारी के कारण कई उतार चढ़ाव आते है । यह डीलवरी के एक दो दिन बाद शुरू होकर तीन हफ़्ते तक चलते है । पोस्टपार्टम डिप्रेशन में कमजोरी और पैरसनिल्टी की कोई कमी नहीं है ।

क्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण

 

स्वयं की अपेक्षा करना , ठीक तरीके से खानपान न करना, पौष्टिक भोजन न लेना, नींद की कमी होना,  नशीली दवाएं का उपयोग करना इसके लक्षण है । इतना ही नहीं थायरायड हार्मोन्स में बदलाव होना , बच्चे होने के बाद महिलाओ के कई तरीके के बदलाव होना । महिलाओ मे एस्ट्रोजन और पोजे स्टरोन हार्मोन्स के स्तर में अधिक गिरावट के कारण तनाव उत्पन्न होता है । इसके साथ ही थायरायड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन्स में अधिक गिरावट के कारण भी तनाव उत्पन्न होता है । थकान और सस्ती महसूस होना । डिलवारी की जगह स्ट्रेच मार्क बढ़ना, बालों को झडना,आदि तनाव का कारण बनता है ।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज क्या है

अगर शुरुआती लक्षण है तो दवाइयों की जरूरत नहीं होती। लेकिन बीमारी बढ़ने पर मनोचिकित्सक को दिखाना जरूरी है । महिलाओ मे मां बनने का अधिक दबाव मत डाले । महिला को भावात्मक जुड़ाव और सहयोग दें ।मेडिकेशन थेरेपी से भी ठीक किया जा सकता है   । महिला की समय समय पर देखभाल करना । काउंसलिंग करने से भी बीमारी ठीक होती है मेडिटेशन करे । योगा करना काफी उपयोगी माना जाता है  गहरी सांस लें और तनाव बिल्कुल भी न लें ।

क्या पुरुषों में भी होता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन

  हमने ऊपर पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में बताया है जो महिलाओ में होता है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह डिप्रेशन पुरुषों में भी हो सकता है तो इसका जवाब हां है डिलीवरी के बाद सिर्फ महिलाएं ही नहीं तनाव , चिड़चिड़ाहट, गुस्सा का शिकार नहीं होती बल्कि पुरुषों। में भी यह देखा जाता है। शोध में पता चला है कि इस बीमारी से पुरुष और महिला दोनों शिकार हो सकते है।  पुरुष तो कई बार इस स्थित में रोने लगते है ।

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