BEE Farming : मधुमक्खी कारोबारियों का संवर रहा भविष्य

जब आप किसी व्यापार की नींव रखते है तो शायद ही उसके मुनाफे का अनुमान हो । लेकिन छोटा से छोटा व्यापार कब बड़ी आमदनी देने लगे आपको उम्मीद भी नहीं होती है ।

देश में कई किसान अभी भी हनी उत्पादन का काम कर रहे है लेकिन लागत और मुनाफे के बीच में उनकी परेशानी कोई नहीं समझता जिससे वह धीरे धीरे इस कारोबार को बन्द कर देते है लेकिन अब किसानो के पास सुनहरा मौका है कि वह फिर से मधुमक्खी पालन और हनी उत्पादन की ओर फिर से अग्रसर हो । इसके लिए मधुमक्खी पालन और हनी उत्पादन के लिए भारत सरकार की योजना का लाभ आप भी ले सकते है । क्या है पूरी योजना यहां जानिए ।

आत्मनिर्भर के तहत मधुमक्खी पालन योजना

सरकार ने इसे मीठी क्रांति का नाम देकर इसकी शुरुआत साल 2017 में की थी । इसके अंतर्गत अब तक 40 हजार लोगों को रोजगार मिला । हनी मिशन योजना ग्रामोधोग विभाग की योजना है । इस योजना के तहत किसान रोजगार के साथ मोटी कमाई कर सकते है । मतलब लोग हनी मिशन के तहत मधुमक्खी पालन कर सकते है । इसे आप रोजगार के साथ बिजनेस के रूप में भी देख सकते है ।

सरकार करती है मदद

अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते है और इसके तहत प्लांट लगाना चाहते है तो सरकार आपकी मदद करेगी । इसमें कमीशन की ओर से आपको 65 फीसदी लोन दिलाया जाता है साथ ही ग्रामोधोग आपको 25 फीसदी की सब्सडी भी देता है मतलब आपको सिर्फ 10 फीसदी ही इन्वेस्ट करना होगा ।

क्या था सरकारी बजट

सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के पैकेज की तीसरी किस्त में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मधुमक्खी पालन को बढावा देने के लिए 500 करोड़ की योजना का ऐलान किया था । इसका लाभ 2 लाख मधुमक्खी पलकों को मिला

क्या है उद्देश्य

  • सरकार ने किसानों के आत्मनिर्भर बनने के लिए 500 करोड़ का पैकेज दिया मधुमक्खी पालन के तहत
  • इसका उद्देश्य ग्रामीण में घनी आबादी उनको रोजगार के अवसर देना
  • महिलाएं और युवाओं को इसी के अंतर्गत रोजगार प्रदान करना
  • आय मे बढ़ोत्तरी करना और हनी उत्पादन को बढ़ावा देना।

कैसे मिलता है फायदा

सरकार का एक मकसद यह भी था कि नई तकनीक से हनी उत्पादन किया जाए । इसके माध्यम से शहद निकालते समय मधुमक्खी मरती नहीं । बल्कि मोम और पालन भी बनता है इससे किसान को फायदा होगा साथ ही बेरोजगार युवा इसे रोजगार समझकर एक कारोबार शुरू कर सकते है । अगर आप 10 बक्सों की इकाई शुरू कर रहे है तो आपको 80 फीसदी अनुदान विभाग की ओर से मिलेगा। अनुमानित तौर पर 10 बक्से इकाई का खर्च 35 हजार आता है इसमें 7 हजार किसान को और 28 हजार सरकार लगाती है ।

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