Census 2022 : सरकार जनगणना से नहीं टीके से आबादी पता करेगी

सरकार ने जब साल 2011 में जनगणना की थी तो देश की आबादी एक अरब 21 करोड़ थी । तब 2001 से 2011 के बीच बढ़ती आबादी का पता लगाया गया था । देश की बढ़ती जनसंख्या का पता लगाने के लिए भारत सरकार प्रत्येक 10 साल में देश की जनगणना कराती है । लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ क्योंकि करोना वायरस की वजह से पिछले दो सालों से यह स्थगित हो रही है और सरकार ने इसे 2031 तक टालने का मन बना लिया है । लब्बोलुआब यह है कि सरकार जनगणना के जरिए नहीं बल्कि करोना टीके के जरिए आबादी का पता लगाना चाहती है ।

करोना के खिलाफ जारी टीकाकरण से केंद्र सरकार टीका लगाने वाले 84.67 करोड़ वयस्क मतलब 18+ की सटीक जानकारी मिल चुकी है । और अब सरकार ने 15 से 18 उम्र के लोगों का भी टीका शुरू करवा दिया है इससे पूरी तरह सटीक तो नहीं लेकिन अंदाजा तो लग ही जाएगा की आखिर देश की आबादी कितनी हुई । वो भी साल 2011 से 2021 तक , इसलिए सरकार का अपना तर्क है कि जनगणना को 2031 तक टालने में कोई परेशानी नहीं है ।

क्या है सरकार का समीकरण

सरकार ने इसके लिए बहुत पहले ही मन बना लिया था फर्क इतना है कि सरकार अपने समीकरण में उलझी हुई थी । केंद्र सरकार ने जुरिसडक्सन को फ्रिज करने का फैसला 30 जून 2022 तक टाल दिया है । मतलब इस पर अगला फैसला अब से 6 महीने बाद ही होगा । आपको बता दें कि इससे पहले सरकार ने 31 दिसम्बर 2020 फिर 31 दिसंबर 2021 की समय सीमा तय की थी । जुरिसडक्सन फ्रीज करने का फैसला जनगणना शुरू करने से तीन महीने किया जाता है । इसमें क्या होता है वो भी समझिए ।

जिला, ब्लॉक , गांव और सीमाएं नहीं बदली जा सकती है । अगर मान लीजिए अब जनगणना का फैसला भी होता है तो 2022 के आखिरी तीन महीने तक से पहले इसे शुरू नहीं किया जा सकता है अगर नया फ्रेम जारी किया जाता है तो आंकड़े 2027 से पहले आना मुश्किल है । और ये आंकड़े फिर 2031 तक ही मान्य रहेंगे । मतलब चार साल बाद फिर एक और दशक की जनगणना आ जाएगी । तो क्या सरकार इतनी जल्दी फिर जनगणना कराएगी ।

जनगणना स्थगित रखने में असमर्थ तर्क

  • लगभग वयस्कों की वैक्सीनेशन पूरी हो चुकी है और बच्चों की वैक्सीनेशन का आंकड़ा सरकार के पास एकत्र हो रहा है इसके बाद सरकार सही आबादी का अंदाजा लगा लेगी ।
  • साल 2026 में लोकसभा सीटों का परिसीमन प्रस्तावित है यह परिसीमन पहले 2021 की जनगणना के आधार पर ही होना था । अगर अब 2022 -2023 में जनगणना शुरू हुई तो नतीजे 2027 तक ही आयेंगे ऐसे में परिसीमन टल जाएगा ।
  • जनगणना के लिए करीब 30 लाख कर्मचारी लगेंगे जिसमे स्कूली शिक्षक ज्यादा होंगे । वैसे भी करोना से पढ़ाई चौपट हुई है तो शिक्षक को लगाना जनगणना में ठीक नहीं है ।
  • दो साल बाद 2024 में आम चुनाव होंगे । 2022 मे 7 और 2023 में 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव होने है इसमें भी कर्मचारी लगेंगे । ये सब आसान नहीं होगा । इसलिए इसे जनगणना टालने पर विचार होगा ।

आप जितना आसान समझते है देश की इतनी बड़ी आबादी की जनगणना करना । ऐसा है नहीं , यह कई चरणों में होता है अधिक पैसे लगते है गिनती होती है प्रोविजनल डेटा जारी होता है तब जाकर देश की असली आबादी पता चलती है ।

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