UTTRAKHAND GLACIER BHRST : कैसे और क्यों टूटते है ग्लेशियर , क्या है वाजिब कारण आइए जानते हैं

 

उत्तराखंड  ग्लेशियर : दुनिया में कई ऐसे देश है जहां ग्लेशियर के टूटने से तबाही जैसा मंजर नजर आता है यही नहीं भारत में भी कई ऐसी जगहें है जहां ग्लेशियर टूटने की खबर साल दर साल मिल ही जाती है। खासकर भारत के उत्तराखंड राज्य में ऐसा देखने को मिल ही जाता है पिछले साल उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमस्खलन की भारी घटना के चलते अलक नंदा और धौलीगंगा नदियों के आसपास भयानक बाढ सी आ गई थी। आपको 2013 की त्रासदी याद है जो केदारनाथ में आई थी उस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था । बदल फटने की वजह से उस तरह की आपदा सामने आई थी ऐसा इसलिए हुआ था कि तब ग्लेशियर फटने की वजह से हुआ था। आपको हम अपने इस आर्टिकल में बताएंगे कि आखिर ग्लेशियर क्या होते है ये कैसे फटते है इससे क्या नुकसान होता है।

क्या है ग्लेशियर बाढ लेक

कई लोग इस आर्टिकल को पढ रहे होंगे तो उन्हे ग्लेशियर क्या होता है शायद न पता हो । हम आपको आसान भाषा में बताएंगे।  सामान्यतया जब ग्लेशियर के पिघलने से बने हिमनद झील में  अधिक मात्रा मे पानी जमा हो जाता है और उसे थामे रखने वाला ग्लेशियर किसी वजह से टूटता है फिर उससे भारी मात्रा में पानी निकलता है मसलन काफी ऊंचाई पर होने वाली इन घटनाओं ऐसी बाड की भानायक्ता ज्यादा होती है

आखिर कब और क्यों टूटते है ग्लेशियर

अधिकांश ग्लेशियर टूटने के कई कारण होते है कटाव, पिघले हुए पानी पर दबाव , बर्फ और चट्टानों का रसखलन और बर्फ के नीच भूकम्प के खटके । इसका एक वाजिब कारण यह भी है कि झील में जमा पानी की भारी मात्रा अपने स्थान से खिसक जाती है । जानकर मानते है कि ग्लेशियर झील के प्रकोप की वजह से बाढ के हालात बनने के कारण भारी बारिश , जमी हुई बर्फ का पिघलना , साथ ही झीलों में तेजी से ढ़ल बनना । इसके प्रमुख कारण हो सकते है

ग्लेशियर लेख में कितना पानी जमा रहता है

आपको बता दें कि ग्लेशियर लेख में पानी की मात्रा अलग अलग रहती है फिर लाखों क्यूबिक पानी जमा हो जाता है अगर बर्फ का पानी पिघलने लगा तो यह पानी बनकर हिमनद झील से कुछ मिनटों मे भी निकल सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि कुछ घंटे भी लग सकते है कुछ दिन भी । लेकिन सबकुछ अचानक हुआ तो तबाही निश्चित है ।

 

 

 

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