Vrindavan Tour : वृंदावन जा रहे हैं तो इन आत्मिक स्थानों पर जरूर घूमें

Vrindavan Tourism : वृन्दावन भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक आत्मिक, धार्मिक और ऐतिहासिक नगर है। वृन्दावन विष्णु के 8वें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान के बाल लीलाओं का स्थान माना जाता है। यह मथुरा से 15 किमी की दूरी पर है। वृन्दावन में अगणित दर्शनीय स्थान हैं। अगर आप वृंदावन घूमने की योजना बना रहे हैं तो आपको वृंदावन के इन प्रमुख और आत्मिक स्थानों पर जरूर घूमना चाहिए।

प्रेम मंदिर (Prem Mandir)

प्रेम मंदिर वृंदावन की खूबसूरती में चार चाँद लगाता है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया गया था। 55 एकड़ में बने इस मंदिर को बनने में 11 वर्ष और लगभग 100 करोड़ रुपये लगे हैं। इसमें इटैलियन संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इसे राजस्थान और उत्तरप्रदेश के अभ्यस्त शिल्पकारों ने तैयार किया है। प्रेम मंदिर की कारीगरी इतनी खूबसूरत कि निर्मोही को भी इससे प्रेम हो जाये।

निधिवन (Nidhivan)

निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, मनोहर और रहस्यमयी धार्मिक स्थान है। यह मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में वो शयन भी करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है।

लगभग दो ढ़ाई एकड़ क्षेत्रफल में फैले निधिवन के वृक्षों की खासियत यह है कि इनमें से किसी भी वृक्ष के तने सीधे नहीं मिलेंगे तथा इन वृक्षों की डालियां नीचे की ओर झुकी तथा आपस में गुंथी हुई प्रतीत हाती हैं। निधिवन जा कर हर कोई ‘कृष्णमय’ हो जाता है।

श्री कृष्ण बलराम मंदिर, इस्कॉन (ISKCON, Vrindavan)

वृंदावन के इस्कॉन मंदिर की बात ही कुछ और है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम को समर्पित है। यही कारण है कि इस मंदिर को कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

यहाँ प्रतिदिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं। मंदिर के अंदर की नक्काशी, पेंटिंग और चित्रकारी बहुत हृदयग्राही है और भगवान के जीवन का वर्णन करती है। इस्कॉन की स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी।

बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple)

बाँके बिहारी मंदिर भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के कण कण में कृष्ण विराजमान हैं। इसका निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था। यह मंदिर आकर सनातन धर्म के प्रति आपकी आस्था चौगुनी हो जायेगी।

गोवर्धन परिक्रमा (Govardhan Parikrama)

गोवर्धन पर्वत भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली है। ब्रजवासियों को द्वापर युग में इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाया था। अगर आप वृंदावन आये हो और आपके आप पर्याप्त समय है तो एक बार गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा जरूर करें।

अनिरुद्धाचार्य जी आश्रम (Aniruddhacharya Ji Ashram)

अनिरुद्धाचार्य जी सनातन धर्म के ज्ञाता और सुप्रसिद्ध कथावाचक हैं। इन्होंने बेहद कम उम्र में ही वेद पुराण और शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था। अगर आप वृंदावन आएं तो इनकी भागवत कथा जरूर सुनें और इनके आश्रम में प्रसाद ग्रहण करें।

केसी घाट (Keshi Ghat)

केसी घाट यमुना किनारे है। यह घाट लोकप्रिय होने के साथ साथ ऐतिहासिक थी है। ऐसा माना जाता है कि केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण ने केशी दैत्य का वध किया था और ब्रजवासियों को उसकी दुष्टता से बचाया था। केशी वध के कारण ही इस स्थान का नाम केशी घाट पड़ा है।

कुसुम सरोवर (Kusum Sarovar)

कुसुम सरोवर की बात ही निराली है। यह सरोवर 450 फीट लंबा और 60 फीट गहरा है। वैसे तो कुसुम सरोवर से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां हैं मगर इसमें सबसे ज्यादा प्रचलित है राधा और कृष्ण की कहानी। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण, राधा जी से हर रोज़ छिप-छिप कर यहीं पर ही मिला करते थे। एक समय राधा रानी और सारी सखियां भगवान कृष्ण के लिए फूल चुनने कुसुम सरोवर गोवेर्धन ही जाया करतीं थीं। कुसुम सरोवर गोवर्धन के परिक्रमा मार्ग में स्थित एक रमणीक स्थल है जो अब राज्य सरकार के संरक्षण में है। कुसुम सरोवर के चारों ओर सैंकड़ों सीढ़ियां हैं। इस सरोवर के आस पास कदम के अनगिनत पेड़ भी मिलेंगे।

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