Baat-Cheet : मैंने कविता को चुना और कविता ने मुझे : मनमीत सोनी

“कह सकते थे कीजिये, थोड़ा और सुधार
तुमने मुँह पर कह दिया, औसत रचनाकार”

युवा कवि मनमीत सोनी का जन्म राजस्थान के सीकर में हुआ। बाद में वो सीकर से चूरू आ गए। इनका कविता से लगाव बचपन से रहा। शिक्षक पिता ने इन्हें कविता की कारीगरी समझायी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नतीजतन मनमीत की पढ़ने की लगन और लिखने की चाहत ने उन्हें देशभर में विशिष्ट पहचान दी। पिछले एक दशक में वो समकालीन कविता के अलग स्वर बनकर उभरे हैं। उनकी कविताएँ साहित्य-जगत से सोशल मीडिया तक यात्राएँ करती रहती हैं। पेश है उनसे की गई बातचीत का एक हिस्सा :

Be-JAGRUK : मनमीत, इन दिनों आपकी कविताएँ सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। आपने पहली कविता कब लिखी?

मनमीत – इस सफ़र की शुरुआत छठवीं क्लास से हुई थी। उन दिनों कादम्बिनी नाम की एक पत्रिका आया करती थी जिसमें एक चिड़िया का चित्र छपा था। मैंने उस पर चार-पांच लाइनें लिखी और पिताजी को पढ़ कर सुनाईं। पिताजी को मेरी कविता पसंद आई और उन्होंने मुझे किताबें पढने के लिए प्रेरित किया। तब से मैंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और आपना लिखने-पढ़ने का सफ़र जारी रखा।

Be-JAGRUK : क्या आपके पिता भी कविताएँ लिखते हैं?

मनमीत – हाँ, पिताजी खुद बहुत अच्छे कवि हैं। उन्हें भी कविताएं लिखने – पढ़ने का शौक है। सच कहूं तो वो मेरे Hero हैं। उन्होंने मुझे कविता लिखने के Craft के बारे में बताया। उनकी बदौलत ही मैं बतौर कवि ख़ुद को तराश सका हूँ। अगर आज मैं ठीक-ठाक लिख पा रहा हूँ तो इसका श्रेय एक हद तक पिताजी को जाता है।

Be-JAGRUK : आपके सबसे पसंदीदा लेखक कौन हैं?

मनमीत – मैंने बहुत-सी किताबें पढ़ी हैं। 400 पन्ने की उपन्यास से लेकर 40 पन्ने की पत्रिका तक मैं पढ़ता आया हूँ। मगर कविताएँ पढ़ने में मन सबसे ज्यादा रमता है। एक राब्ता महसूस करता हूँ कविताओं से। उर्दू शायरी से ख़ासा लगाव है मुझे। ग़ालिब, ख़ुदा-ए-सुखन मीर, जिगर मुरादाबादी, फिराक गोरखपुरी को काफ़ी पढ़ा है मैंने। और अगर आधुनिक शायरी की बात करूँ तो बशीर बद्र, निदा फ़ाज़ली, दुष्यंत कुमार, मख़मूर सईदी, शीन काफ़ निज़ाम जैसे शायरों से मेरा लगाव रहा है। अगर हिंदी साहित्य की बात करूँ तो निराला, मुक्तिबोध, मंगलेश डबराल, विष्णु खरे, केदारनाथ जी जैसे कवियों को पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। क्लासिक तो क्लासिक ही होता है। साथ ही साथ राजस्थानी साहित्य ने भी मुझे प्रभावित किया। इन्हीं उधेड़बुन के बीचों-बीच मैंने कविता को चुना और कविता ने मुझे।

Be-JAGRUK : कविता लिखने के अलावा आपको क्या करना पसंद है?

मनमीत – सच कहूं तो ज्यादातर समय मैं किताबों में ही उलझा रहता हूँ। मगर जब भी वक़्त मिलता है तब मुझे खाने पीने का, घूमने फिरने का और त्यौहारों का शौक रहता है। त्यौहार आते ही मैं बचपन में लौट जाता हूँ। दशहरा में दोस्तों के संग मेला घूमना, दीपावली पर पटाखे फोड़ना और मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी करना मुझे सुकून देता है।

Be-JAGRUK : हाल ही में आयुष्मान खुराना ने आपकी कविता अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में शेयर की थी। यह अनुभव कैसा था?

मनमीत – अनुभव बेहद खूबसूरत था। आयुष्मान को कविताओं की ठीक समझ है। वे दूसरों की कविताएँ भी साझा करते रहे हैं। अगर उन्हें मेरा लिखा कुछ पसंद आया हो तो जाहिर सी बात है कि मुझे भी अच्छा लगा। वैसे एक बात बता दूँ कि यह पहली दफ़ा नहीं है जब आयुष्मान ने मेरी कविता साझा की हो। इससे पहले उन्होंने ट्विटर पर मेरी एक कविता शेयर की थी।

Be-JAGRUK : नये कवियों को कोई सलाह देना चाहेंगे?

मनमीत : मैं तो ख़ुद कविता की भाषा में तुतलाना सीख रहा हूँ। उन्हें बस इतना कहना चाहूंगा कि कविता समय, रियाज़ और एकांत मांगती है। अगर आप अपनी कविताओं के साथ समय बिता सकते हैं तो आप बेहतर कवि बन सकते हैं। मैंने यह भी अनुभव किया है कि आज कल के कवि सोशल मीडिया पर कम समय में फेम पाना चाहते हैं। इस चक्कर में वह अपनी Quality के साथ Compromise कर लेते हैं। यह मेरी नज़र में ग़लत है।

अच्छा लिखने वालों को फेम आज नहीं तो कल मिल ही जाता है। इसलिए खुद को दिन प्रतिदिन तराशें। आपने मिज़ाज के अनुरूप खूब पढ़ें और Command हासिल करें। आधी अधूरी जानकारी ना लें। अगर आप ग़ज़ल लिखना चाहते हैं तो ग़ज़ल से जुड़ी हर एक जानकारी प्राप्त करें और फिर ग़ज़ल लिखें। अगर आपका नज़्म लिखने में दिल लगता है तो नज़्म के बारे में हर बात सीखिये। बस, आधी अधूरी जानकारी और आधी अधूरी अनुभूतियों के आधार पर कविताएँ ना लिखें।

Be-JAGRUK : भविष्य में बतौर लेखक आप अपने आप को कहाँ देखते हैं?

मनमीत : मैंने कोई योजना नहीं बनाई है। मुझे बस अपने वर्तमान के बारे में पता है। वर्तमान में मैं दोहे और कविताएँ लिख रहा हूँ। दोहे इधर उधर प्रकाशित होते रहते हैं। और मेरा पहला कविता संग्रह भी समय पर आ ही जाएगा। वैसे मेरा मानना है कि किताब लिखना किसी कवि का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। किताबें बोले या ना बोले कविता बोलती रहनी चाहिए।

Be-JAGRUK : अच्छी कविता और बुरी कविता में क्या अंतर है?

मनमीत : आपको इंटरव्यू देने से ठीक पहले मैंने फेसबुक पर एक कविता पोस्ट की थी। पोस्ट करते वक़्त लग रहा था कि मैंने कुछ अनोखा लिख दिया है मगर पोस्ट करने के बाद मुझे अंदाज़ा हुआ कि मैंने कुछ ‘बकवास’ चीज़ लिखी है। फिर मैंने उस कविता को तुरंत अपने Profile से हटाया। मेरी समझ में अच्छी कविता और बुरी कविता का कोई तय पैमाना नहीं है। कविता अगर होनी होगी को एक पंक्ति में भी हो जायेगी वर्ना चार पन्नों में भी नहीं होगी।

Be-JAGRUK : हमसे बात करने के लिए आपका आभार और भविष्य के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमें आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स का इंतजार रहेगा।

मनमीत : जी, आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया इस प्यारे से इंटरव्यू के लिए। आशा है दोबारा मुलाकात होगी।

1 thought on “Baat-Cheet : मैंने कविता को चुना और कविता ने मुझे : मनमीत सोनी”

  1. साक्षात्कार की हर पंक्ति को धीरे-धीरे पढ़ा और लगा तजुर्बे से लिखा है जनाब ने । यूं ही बढ़ते रहिए और निखरते रहिए । आगामी समय में होने वाले कवियों के लिए आप आदर्श साबित होंगे 😊

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