Bhai Dooj 2021 : भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है भाई दूज, जानें सनातन धर्म में इसका महत्व

आज भाई दूज का पावन त्योहार है। यह त्योहार भाईयों के प्रति बहनों की श्रद्धा और विश्वास का पर्व है। रक्षाबंधन की तरह यह त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस पर्व को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन स्नेह पूर्वक मनाया जाता है। इस दिन बहनें पूजा करती हैं, अपने भाई को तिलक लगाती हैं, कथा कर व्रत रखती हैं और उनकी लंबी उम्र, अयोग्य जीवन और सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। आसान भाषा में कहें तो इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य है भाई-बहन के मध्य सौमनस्य और सद्भावना का पावन प्रवाह सदैव प्रवाहित रखना तथा एक-दूसरे के प्रति निष्कपट और निस्वार्थ प्रेम को प्रोत्साहित करना है। अमूमन यह त्योहार होली और दीवाली के तीसरे दिन होता है। हाँ, कभी-कभार समय में बदलाव भी हो सकता है।

भाई दूज की सनातन धर्म में क्या मान्यता है?

सनातन धर्म के मुताबिक, ऐसी धार्मिक आस्था है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है।
उसके कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव की प्राप्ति होती है। इस दिन बहन भाई की लंबी आयु के लिए यम की भी पूजा करती हैं। इस कारण इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भाई, बहन से तिलक करवाता है, उसे कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। उसकी आयु निश्चित रूप से लंबी होती है। वह सब विघ्नों से दूर रहता है।

पीएम मोदी और अमित शाह ने देशवासियों को दी भाई दूज की शुभकामनाएं

भाई-बहनों को समर्पित पर्व भाई दूज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सभी देशवासियों को भाई दूज की ढेरों शुभकामनाएं। रक्षाबंधन के बाद, ‘भाई दूज’ ऐसा दूसरा त्योहार है, जो भाई-बहन के बीच स्नेह को समर्पित है।’’

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ”समस्त देशवासियों को “भाई दूज” के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।”

जानिये भाई दूज की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा की मानें तो भगवान सुर्य और उनकी पत्नी संध्या की संतान धर्मराज यम और यमुना थे। लेकिन भगवान सूर्य के तेज को संध्या देवी सहन न कर पाई और यमराज और यमुना को छोड़ कर मायके चली गईं। वे अपनी जगह प्रतिकृति छाया को भगवान सूर्य के पास छोड़ गईं। यमराज और यमुना छाया की संतान न होने के कारण मां के प्यार से सदा रहित रहे, लेकिन दोनों भाई-बहन में आपस में अपार प्रेम था। युमना की शादी के बाद धर्मराज यम बहन के बुलाने पर यम द्वितीया के दिन उनके घर पहुंचे। भाई की आने की खुशी में यमुना जी ने भाई का तहे दिल से सत्कार किया। और यमराज को तिलक लगा कर पूजन किया। तब से हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।

भाई दूज की तिथि एवं शुभ मुहूर्त

भाई दूज का त्योहार इस बार 6 नवंबर, शनिवार के दिन मनाया जा रहा है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस साल भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:10 से 3:21 तक है। यानि शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 11 मिनट तक है।

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