Bharat Bangladesh Sambandh: भारत- बांग्लादेश के बीच रिश्ते खट्टे मीठे चिंता का विषय

हमनें जिसको आजादी दिलाई जिसके लिए हमने अरबों के सैन्य हथियार जंग लडने में लगा दिए । हजारों सैनिकों के बलिदान दिए यहां तक की सबसे पहले हमने आजादी की मान्यता दी । आज वही बांग्लादेश हमसे नजदीक होने की बजाय चीन और पाकिस्तान का हमदर्द हो चुका है । यह बात सच है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ सालों से कभी नफरत तो कभी प्यार भरे रहे है अभी दो दिन पहले बांग्लादेश और भारत ने मिलकर मैत्री दिवस मनाया । क्योंकि 6 दिसंबर 1971 को एक स्वतंत्र देश के रूप में भारत ने मान्यता दी थी ।

भारत ने क्या कुछ नहीं किया बांग्लादेश के लिए । याद कीजिए बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने करोड़ों शरणार्थियों को शरण दी थी । लेकिन आज 50 साल बाद भी दोनों के रिश्ते खट्टे मीठे बने हुए है ऐसा क्यों । दोनों देशों के नागरिकों मे कई ऐसे लोग है जो एक दूसरे को पसंद भी करते है और नफरत भी करते है आखिर ऐसी क्या वजह है कि बांग्लादेश की राजनीति और कूटनीति भारत के प्रति अचानक बदल गई वो कुछ सालों से । इसे समझना बहुत जरूरी है जब दोनों देश मैत्री दिवस मना रहे थे तो सोशल मीडिया पर कई टिप्पणियां ऐसी थी जिसमे भारत की तारीफ हो रही थी तो बहुत लोग गलत कमेंट कर भारत को कोस रहे थे ।

दोनों को है एक दूसरे से शिकायत

बांग्लादेश को जब आजादी मिली थी तो भारत ही वो पहला देश था जिसके साथ बांग्लादेश के सबसे मजबूत रिश्ते हुए थे मगर बांग्लादेश ने अपने दायरे को बढ़ाया और आहिस्ते आहिस्ते दुनिया के कई देशों के साथ उसके सम्बन्ध बनते गए । बांग्लादेश अपने नफा नुकसान को देखते हुए भारत से रिश्ते कायम किए । लेकिन पिछले कुछ समय से जो हुआ उसकी वजह से ही मतभेद हुए ।

मुद्दे जो दोनों की दूरियां का कारण बनी है Current Problems Between India & Bangladesh

महिलाओं और बच्चों की तस्करी
  • सीमा पर हत्या
  • नशीली दवाओं की घुसपैठ
  • महिलाओं और बच्चों की तस्करी
  • रोहनिया शरणार्थी का मामला
  • एनआरसी

ऐसे तमाम मुद्दों ने दोनों की दूरियां का कारण बनी है उधर बांग्लादेश यह आरोप लगाता है कि भारत बड़ा मुल्क और बड़ी अर्थवयवस्था होने के नाते बांग्लादेश का शोषण कर रहा है पांच दशक बाद भी दोनों के अलग अलग नजरिए क्यों है अभी भी बांग्लादेश के एक तबके में भारत विरोधी नकारात्मक सोच पैदा करने के पीछे कुछ मनोवैज्ञानिक है और दोनों के बीच अनसुलझे मुद्दे भी है इसके पीछे मुख्य रूप से फरक्का और तीस्टा का पानी का बंटवारा प्रमुख मुद्दा बना हुआ है सीमा पर अगर अवैध घुसपैठ नहीं होती तो भारत हत्याएं करता है और फिर जब सवाल पूछा जाता है तो उसकी सफाई बांग्लादेश स्वीकार नहीं कर पाता ।

मगर भारत का मानना यह है कि बांग्लादेश मे हिन्दू खतरे में है याद कीजिए पिछले महीने बांग्लादेश में हिंदुर मंदिर तोड़ा गया और हिन्दुओं के साथ बर्बरता हुई । हिन्दू की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है बांग्लादेश इसे क्यों नहीं स्वीकार करता । जानकार मानते है कि कोई बड़ा मुद्दा नहीं है अगर टेबल पर बात की जाए तो सबकुछ सुलझाया जा सकता है।

रिश्तों में नरमी आई

हमने ऊपर कितनी भी बातें की है सिर्फ उतना ही नहीं है दोनों देशों के बीच । यह बात सही है कि बांग्लादेश और भारत के बीच एक दशक से रिश्ते सुधरे है दोनों देशों के बीच करीब 4000 हजार किलोमीटर की सीमा है और भारत छोटे देश के तौर पर नहीं देखता । बांग्लादेश कुछ दशक से एक बड़ी अर्थ्यवस्था बनकर उभर रहा है मगर बांग्लादेश की चिंता यह है कि भारत निवेश करने से पीछे क्यों हट रहा है । जबकि चीन ने अपना हित साधने के लिए बांग्लादेश में भारी मात्रा में निवेश किया है।

जिसकी वजह से चीन से नजदीकियां लाजमी है । यह बात सच है कि भारत ने निवेश में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है बांग्लादेश हमेशा से भारत को बड़ा भाई मानता आया है तो उससे उम्मीद भी बहुत करता है मगर भारत ने निराश किया जिसकी वजह से उसका मन बदला है । लेकिन अभी भी समय है कि दोनों देश एक दूसरे के साथ चले । आयात और निर्यात में इजाफा करें । नहीं तो आने वाले समय में भारत सिर्फ बांग्लादेश का मित्र नाम भर के लिए होगा ।

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