UP Election 2022 : पूर्वांचल के बाद पश्चिमी यूपी दे रहा बीजेपी को चुनौती

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सियासी रण तैयार है जिसके लिए छोटी बड़ी सभी पार्टियों ने कमर कस ली है कोई अपने सियासी तरकश से पुराने तीर पर दांव आजमा रहा है तो कोई नए तीर को मौका दे रहा है । उधर सत्ताधारी पार्टी भाजपा परेशानी में नजर आ रही है ।

विपक्ष के तौर पर सिर्फ अखिलेश यादव ही चुनौती दे रहे है लेकिन बीजेपी के लिए चुनौती तो पश्चिमी यूपी की जनता बन रही है पिछले दो महीने से यूपी की बागडोर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों में ले ली है तभी तो 7 नवम्बर से 28 दिसंबर तक मोदी के ज्यादातर पूर्वांचल के दौरे रहे है कहां उन्होंने योजनाओं का पिटारा खोल दिया । लेकिन उनको पता था कि सिर्फ पूर्वांचल से ही काम नहीं चलेगा असल चुनौती तो पश्चिमी यूपी है जहां से किसानों का गढ़ माना जाता है । कृषि कानून और आंदोलन समाप्त के बाद भी भाजपा किसानों को खुश करने मे जुटी है। कुल मिलाकर पार्टी समझ चुकी है कि उसे दुगनी मेहनत करनी पड़ेगी ।

क्या कहती है बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी की राजनीति

पिछले कुछ चुनावों ने साफ किया है कि यूपी में दोबारा सत्ता किसी को नहीं मिली । 2007 में जब बसपा जीती थी तो 2012 में उसे हार मिली और समाजवादी पार्टी सत्ता में आई । इसके बाद 2017 में सपा की हार और बीजेपी सत्ता में काबिज हो गई । खैर असल बात यह है कि बीते कुछ समय से बीजेपी के कई नेता पश्चिमी यूपी में डेरा डाले है और रैली पर रैली कर रहे है उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने 25 नवम्बर को ही पश्चिमी यूपी का दौरा किया था। तो 28 नवम्बर को बिजनौर और शामली में ट्रैक्टर रैली निकाली । 2 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने सहारनपुर में रैली की । और अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में 700 करोड़ की मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स युनिवर्सिटी का शिलान्यास किया । नरेंद्र मोदी जानते है कि किसानों की नाराज़गी नहीं जाने वाली । इसलिए खेल के माध्यम से चुनावी बिसात बिछा रहे है ।

किसान बदलेगा पश्चिमी यूपी की चुनावी गणित

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान बिल की वापसी की तो कई राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाए की अगर उत्तर प्रदेश में चुनाव नहीं होता तो सरकार किसी भी कीमत पर बिल वापसी नहीं करती और किसानों का आंदोलन आगे ऐसे ही चलता रहता। उधर विपक्ष किसान बिल वापसी के बाद किसानों की मौत पर राजनीति रोटियां सेकने लगे और किसानों को सरकार के प्रति भड़काने का काम शुरू कर दिया । ऐसे बयानों के बावजूद भाजपा को इस बात को इल्म है कि उसे अपनी किसान विरोधी छवि को दुरस्त करने की कोशिश करनी होगी । पीएम किसानों से माफी भी मांग चुके है। आप कुछ भी सोचिए लेकिन किसान ही पश्चिमी यूपी का गणित बदलेगा । जो बीजेपी जे लिए परेशानी का सबब है ।

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