Padma Awards 2020 : कौन हैं शरीफ चाचा? क्यों हर तरफ बस इनकी ही बात हो रही है?

भारत सरकार ने कल साल 2020 के लिए पद्म पुरस्कार से उन लोगों को सम्मानित किया जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जैसे कि, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में विशिष्ट योगदान दिया हो। इस वर्ष सरकार ने 7 लोगों को पद्म विभूषण, 16 को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा। इस लिस्ट में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें हमने कभी ना देखा या सुना है। मगर इस बार कुछ ऐसे भी लोगों को सरकार ने सम्मानित किया है जिनके बारे में पब्लिक डोमेन में कुछ जानकारी तक नहीं है। क्योंकि इन लोगों ने वाहवाही बटोरने के लिए कभी काम नहीं किया। यह जमीन से जुड़े लोग हैं जिनका मकसद है निस्वार्थ भाव से सेवा करना।

इस कड़ी में जो सबसे चर्चित नाम है वह है ‘मोहम्मद शरीफ’ उर्फ शरीफ चाचा का। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं मोहम्मद शरीफ जिन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार दिया है।

पेशे से एक साइकिल मैकेनिक मोहम्मद शरीफ उर्फ शरीफ चाचा अयोध्या में खिड़की अली बेग मोहल्ले के रहने वाले हैं। शरीफ ने करीब 25 सालों से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। फैजाबाद और उसके आसपास के इलाकों में उन्होंने अब तक करीब 25000 शवों का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया है। मोहम्मद शरीफ का मानना है कि उन्होंने धर्म के आधार पर आजतक शवों के संस्कार में भेदभाव नहीं किया। मृतक व्यक्ति के धर्म को ध्यान में रखते हुए ही उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। अगर मृतक मुस्लिम है तो उसे दफनाया जाता है और अगर वह हिंदू है तो उसे मुखाग्नि दी जाती है।

मगर शरीफ चाचा ने यह दारोमदार क्यों उठाया है? किस घटना ने उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा दी?

सूत्रों के मानें तो शरीफ चाचा के एक बेटे की हत्या कर उसके शव को कहीं फेंक दिया गया था। बहुत तलाश करने के बाद भी शव का कोई नामोनिशान नहीं मिल सका। इस दर्दनाक घटना के बाद उन्होंने यह ठान लिया कि वह लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने का जिम्मा उठाएंगे। तब से अबतक बिना किसी स्वार्थ के उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है और समाज में एक मिसाल पेश की है।

शरीफ चाचा जैसे लोगों की आज हमें सबसे ज्यादा जरूरत है। क्योंकि ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारी लाइमलाइट में आने के लिए नहीं निभाते बल्कि दुनिया को बेहतर बनाने के लिए निभाते हैं।

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